ગુરુવાર, 17 જુલાઈ, 2025

पल के लिए

 पल-पल तड़पे, कुछ पल के लिए,

वो पल भी आया, कुछ पल के लिए।

सोचा था थाम लूं,उसे उम्र भर के लिए

पर वो पल भी ठहरा, कुछ पल के लिए।


तेरा इश्क़ था या इंतज़ार का इम्तिहान,

हम तो मिट गए, एक मिलन के लिए।

तेरी हँसी को सजाया मेरे हर ख़्वाब ने, 

तू मुस्कुराया भी बस, नक़ाब के लिए।


पल-पल तड़पे, कुछ पल के लिए,

वो पल भी आया, कुछ पल के लिए।

सोचा था थाम लूं,उसे उम्र भर के लिए

पर वो पल भी ठहरा, कुछ पल के लिए।


तेरे संग गुजारे वो पल, तेरी याद दिलाते है,

 मेरी नज़रों ने चाहा तुजे, बस कल के लिए। 

रंगीन थे वो सारे पल, जो तेरे साथ गुजारे,

मगर दिल तरस रहा है, हर पल के लिए।


पल-पल तड़पे, कुछ पल के लिए,

वो पल भी आया, कुछ पल के लिए।

सोचा था थाम लूं,उसे उम्र भर के लिए

पर वो पल भी ठहरा, कुछ पल के लिए।


अब तू नहीं, तेरी सारी जुस्तजू भी नहीं,

यादें बचीं हैं बस, हलचल के लिए। 

अब "चाँद " लिख रहा है तेरी यादें,

और सांसें रुक गईं, एक ग़ज़ल के लिए।


पल-पल तड़पे, कुछ पल के लिए,

वो पल भी आया, कुछ पल के लिए।

सोचा था थाम लूं,उसे उम्र भर के लिए

पर वो पल भी ठहरा, कुछ पल के लिए।

શનિવાર, 12 જુલાઈ, 2025

हर घर को सजाना बस, Platina ब्रांड का है काम

इंडिया से दुनिया तक, टाइल्स में बस एक नाम,

हर घर को सजाना बस, Platina ब्रांड का है काम।


फर्श हो या दीवार, Platina दे सुंदर धाम,

स्टाइल, मज़बूती और शाइन – यही है पैगाम।


इंडिया से दुनिया तक, टाइल्स में बस एक नाम,

हर घर को सजाना बस, Platina ब्रांड का है काम।


डबल चार्ज हो या ग्लेज़, दिखे क्वालिटी का काम,

हर डिज़ाइन कहे – Platina से बढ़े घर का मान।



इंडिया से दुनिया तक, टाइल्स में बस एक नाम,

हर घर को सजाना बस, Platina ब्रांड का है काम।


हर कोना मुस्काए, जब Platina हो साथ,

हर टाइल में छिपी हो जैसे सजावट की सौगात।


इंडिया से दुनिया तक, टाइल्स में बस एक नाम,

हर घर को सजाना बस, Platina ब्रांड का है काम।


घर की शान बढ़ाए, बिना बोले दे सलाम,

Platina टाइल्स का हर पैटर्न है खास इनाम।


इंडिया से दुनिया तक, टाइल्स में बस एक नाम,

हर घर को सजाना बस, Platina ब्रांड का है काम।


टेक्सचर, फिनिश, और कलर की हो बात,

मज़बूती के संग हो रही है स्टाइल की मुलाक़ात,


इंडिया से दुनिया तक, टाइल्स में बस एक नाम,

हर घर को सजाना बस, Platina ब्रांड का है काम।


શુક્રવાર, 11 જુલાઈ, 2025

गुरु देखूं

 


कहाँ मुझे फ़ुर्सत कि मैं मौसम
सुहाना देखूं,
दिल तो लगा है गुरु में, क्यों ज़माना देखूं।

हर पल उन्हीं की याद में कटता है ये सफ़र,
ख़्वाब भी वही दिखें, क्यों और फसाना देखूं।

वो जो दिखा गए राहें, मंज़िलों से आगे,
अब उनके क़दमों को ही मैं आसमाँ देखूं।

लोग कहते हैं — 
मौसम देखोबहारें देखो,
मैं कहूं — गुरु की छांव है, क्यों नज़ारा देखूं।


ज़िन्दगी की किताब में बस नाम उनका लिखा,
अब और क्या पढ़ूं, क्या में फ़साना देखूं।

ना चाँद की चाह है अब, ना सितारों का नूर,
उनकी बातों में है रौशनी, कहाँ आशियाना देखूं।