ગુરુવાર, 3 ઑક્ટોબર, 2024

बदल रही है ज़िन्दगी और मेरे जज्बात


 किसको कहूँ कैसे कहूँ अब में, मेरे दिल की बात,

कुछ इस तरह बदल रही है, ज़िन्दगी और मेरे जज्बात |


शेयर, लायक, कमेंट से मसगुल है सोशल मीडिया की सौगात,
कुछ इस तरह बदल रहे है, दोस्त और उसकी मुलाकात |
किसको कहूँ कैसे कहूँ अब में, मेरे दिल की बात,
कुछ इस तरह बदल रही है, ज़िन्दगी और मेरे जज्बात |


सर्च और वॉच  का है ज़माना,  ओ टी टी की बात,
रेडियो, टीवी और सिनेमा, यह सब पुराने ख्यालात|
किसको कहूँ कैसे कहूँ अब में, मेरे दिल की बात,
कुछ इस तरह बदल रही है, ज़िन्दगी और मेरे जज्बात |


युवा पीढ़ी कर रही है, स्वतंत्र परिवार  की बात,
कुछ इस तरह जुदा हो रहे हैं, संयुक्त परिवार और रिश्तों के हालात।
किसको कहूँ कैसे कहूँ अब में, मेरे दिल की बात,
कुछ इस तरह बदल रही है, ज़िन्दगी और मेरे जज्बात |


फ.बी., इंस्टा और व्हाट्सप्प पे, होती है रोज बात,
पत्र और किताबे ये सब, हैं वो पुराने ख्यालात |
किसको कहूँ कैसे कहूँ अब में, मेरे दिल की बात,
कुछ इस तरह बदल रही है, ज़िन्दगी और मेरे जज्बात |


कभी थी जो महफिलें, अब वो वर्चुअल बन गई हैं रात,
कुछ इस तरह जुदा हो रहे हैं, मुस्कान और हमारी बात।
किसको कहूँ कैसे कहूँ अब में, मेरे दिल की बात,
कुछ इस तरह बदल रही है, ज़िन्दगी और मेरे जज्बात |

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